
दरअसल, तमाम तरह की अमेरिकी पाबंदियों के बाद उत्तर कोरिया अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान था। लेकिन तानाशाह किम को यह डर ज्यादा सता रहा था कि कहीं समझौते के लिए तैयार होने के बाद अमेरिका उनके साथ वही बर्ताव न करे जो उसने इराक के सद्दाम हुसैन और लीबिया के कर्नल गद्दाफी के साथ किया था। संभवतः अमेरिका के आश्वासन के बाद किम को यह भरोसा हो गया है कि उसके साथ वैसा व्यवहार नहीं होगा। हालांकि इस शिखर बैठक की पृष्ठभूमि कई तरह से तैयार की गई थी। इसमें किम की चीन यात्रा का भी योगदान है तो उत्तर और दक्षिण कोरिया के शासकों की वार्ता का भी।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
from दैनिक भास्कर https://ift.tt/2t2Z7vc
via
Labels: Editorial
0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home